राज्य सरकार द्वारा नि:शक्तों की मदद के लिए चलेगा '' स्पर्श अभियान'' अभियान के जरिये
नि:शक्तजनों का चिन्हांकन कर उनके उपचार/कृत्रिम अंग/सहायक उपकरण/ स्वरोजगार, शिक्षण-प्रशिक्षण
की व्यवस्था करना एवं पात्र नि:शक्त व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाना इस अभियान का प्रमुख
उद्देश्य है।
प्रस्तावना :- नि:शक्त व्यक्ति (समान अवसर,
अधिकार, संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम 1995 की धारा-2 (झा) में वर्णित नि:शक्त,
मानसिक मंदत्ता और मानसिक रूग्णता के रूप में परिभाषित किया गया है तथा म.प्र.निराश्रित
एवं निर्धन व्यक्ति की सहायता अधिनियम 1970 के अन्तर्गत ऐसे वृद्व एवं शिथिलांग व्यक्ति
जिनने आयु 60 वर्ष पूर्ण कर ली हो और वह आजीविका कमाने के लिए असमर्थ हो, जिसमे दृष्टिबाधित,
श्रवणवाधित, मानसिक विकलांग, मानसिक बीमारी से ग्रसित या अस्थाई विकलांग हो, आते हैं।
यह सभी लोग भारत के नागरिक हैं इनको भी अन्य नागरिकों की तरह समाज में रहने का अधिकार
है तथा इनके अधिकारों का संरक्षण सामाजिक, आर्थिक क्षेत्र में भी इन्हें पूर्ण भागीदारी
का अधिकार है। म.प्र.शासन मानसिक मंदत्ता, मानसिक रूग्णता और ऐसे वृद्व शिथिलांग जो
अपनी जीविका चलाने के लिए असमर्थ हैं, के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं संचालित की हैं।
वृद्वजनों एवं नि:शक्तजनों को मासिक पेंशन के अलावा जो बहुविकलांग एवं मानसिक रूप से
अविकसित हैं उनको रूपये 500/- प्रतिमाह की विशेष आर्थिक सहायता, वृद्वाश्रम एवं आवासीय
संस्थाएं संचालित की गई हैं, लेकिन योजनाओं का लाभ इन व्यक्तियों को मिले यह सुनिश्चित
करना एक बहुत बड़ी चुनौती है।
इस श्रेणी के व्यक्तियों के परिवार के सदस्य परिस्थितिवश
भरण-पोषण का दायित्व नहीं उठा पाते हैं और उनका परित्याग करते हैं जिसके फलस्वरूप इनमें
से कई लोगों को सड़कों पर भटकना अथवा रहना पड़ता है। न तो इनके पास सोने का स्थान होता
है, न ही पहनने के लिए पर्याप्त कपड़े होते हैं, और न ही भोजन की व्यवस्था हमेशा हो
पाती है, जिस कारण भीख पर आश्रित होने के लिए भी बाध्य होना पड़ जाता है, जबकि यह सभी
समाज में सम्मानपूर्वक जीने के हक रखते हैं।